Principal's Desk​

प्राचार्य का संदेश

Dr Prof Premlata Kumari (Principal)

संत नारायण स्वामी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नारायण नगर की ओर से मैं समस्त हितधारकों, अभिभावकों, पूर्व छात्र-छात्राओं, विद्यार्थियों तथा समाज के सम्मानित नागरिकों का हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत करता/करती हूँ। हमारा यह महाविद्यालय शिक्षा, संस्कृति और समाज सेवा का अद्वितीय संगम है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के साथ-साथ उनके समग्र व्यक्तित्व का विकास करना है।

महाविद्यालय की स्थापना सितम्बर 1983 में इस पवित्र पर्वतीय क्षेत्र में की गई थी, ताकि यहाँ के युवाओं को अपने घर-आँगन में ही उत्कृष्ट शिक्षा के अवसर प्राप्त हो सकें और उन्हें बड़े शहरों की ओर पलायन न करना पड़े। आज यह संस्थान ज्ञानार्जन का एक सशक्त केंद्र बन चुका है, जो निरंतर नई ऊँचाइयों को छू रहा है।

यहाँ कला एवं विज्ञान संकायों के साथ-साथ विविध व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक और रोजगारपरक शिक्षा से भी समृद्ध करना है। आधुनिक समय की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए महाविद्यालय में कंप्यूटर प्रशिक्षण एवं योग शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे विद्यार्थी शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से सुदृढ़ बन सकें।

हमारा महाविद्यालय इग्नू (IGNOU) और उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के अभिसरण योजना (Convergence Scheme) के अंतर्गत अनेक उपयोगी एवं नवीन पाठ्यक्रमों/कार्यक्रमों का संचालन कर रहा है। ये पाठ्यक्रम युवाओं को रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर एवं समाजोपयोगी बनने का अवसर देते हैं।

गुणवत्ता एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए महाविद्यालय को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) द्वारा “B” ग्रेड से सम्मानित किया गया है, जो हमारे सतत प्रयासों और शैक्षणिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

हमारा विश्वास है कि संत नारायण स्वामी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय आने वाले समय में भी ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और समाज सेवा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा और क्षेत्रीय विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा।

सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों और समाज के हितधारकों से हम अपेक्षा करते हैं कि वे इस संस्थान की प्रगति में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएँ और शिक्षा के इस प्रकाश को और अधिक दूर तक फैलाने में सहयोग करें।

शुभकामनाओं सहित,

(प्रो0 प्रेमलता कुमारी)